चुनाव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चुनाव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 7 नवंबर 2010

आज थमेगा चुनावी शोर

विधान सभा के पांचवें चरण में 35 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए प्रचार का शोर रविवार की शाम थम जायेगा। पांचवें चरण में भोजपुर जिला की 7, नवादा की 5, गया की 5, शेखपुरा की 2, नालंदा की 7, पटना की 4 अरवल की 2, जहानाबाद की 3 सीटों के लिए 9 नवम्बर मंगलवार को मतदान होगा। इसी चरण में पटना के फुलवारी, मसौढ़ी, पालीगंज और बिक्रम में भी मतदान है। 35 सीटों में सात सीट यानी राजगीर, फुलवारी, मसौढ़ी, अगिआंव, मखदुमपुर, बोधगया और रजौली अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट हैं। नक्सलियों के प्रभाव आदि को देखते हुए 13 क्षेत्रों में मतदान का समय तीन बजे तक निर्धारित था मगर अंतिम समय में चुनाव आयोग ने चार और क्षेत्रों के समय में परिवर्तन कर दिया है। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की अनुशंसा के आलोक में आयोग ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

तीसरे चरण में 54 प्रतिशत वोट पड़े

बिहार विधानसभा की 48 सीटों के लिए व्यापक सुरक्षा के बीच गुरुवार को शांतिपूर्ण मतदान हुआ। मतदान के तीसरे चरण में भी मतदाताओं का उत्साह बरकरार रहा और 54 प्रतिशत वोट पड़े। बिहार में अभी तक आधी से ज्यादा सीटों पर मतदान हो चुका है। बढ़े मतदान प्रतिशत से सभी दलों की आशाएं उछाल मार रही हैं। हर दल अपने पक्ष में इसका आकलन कर रहा है। सत्ताधारी जदयू महिलाओं की बढ़ी भागीदारी अपने हित में मान रहा है। विपक्ष का मानना है कि ज्यादा मतदान सत्ता के विरोध में ही होता है।

बिहार की 243 सीटों में 140 सीटों पर मतदान हो चुका है। हर चरण में 53 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। गुरुवार को तीसरे चरण में 54 फीसदी मतदान हुआ, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में 47.3 फीसदी और लोकसभा चुनाव में 43.8 फीसदी मतदान हुआ था। चुनाव आयोग इस वृद्धि को अपनी कोशिश का नतीजा मानता है।अभी तीन चरणों में 103 सीटों पर चुनाव होने बाकी हैं।

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

बिहार में 48 सीटों के लिए आज थमेगा प्रचार

विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार को शाम आठ जिलों की 48 सीटों पर चुनावी प्रचार का शोर थम जायेगा। यहां 28 अक्टूबर यानी गुरुवार को वोट डाले जायेंगे। तीसरे चरण में 785 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 65 महिलाएं हैं।

राज्य के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी कुमार अंशुमाली ने बताया कि रक्सौल में सबसे कम 7 और महुआ में सबसे अधिक 31 उम्मीदवार हैं। 19 क्षेत्रों में 16 से अधिक प्रत्याशी हैं। सात सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। जबकि तीन सीटों पर मतदान 3 बजे तक ही होगा। हरसिद्धि, भोरे, दरौली, गरखा, राजापाकड़, रामनगर और पातेपुर यानी सात सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पातेपुर, वाल्मीकिनगर और रामनगर में मतदान सुबह सात बजे से तीन बजे तक होगा जबकि अन्य सीटों पर पांच बजे तक। पूर्वी चंपारण में 7, प.चंपारण में 9, गोपालगंज में 6, सिवान में 8, सारण में 10 तथा वैशाली जिले में 8 विधानसभा सीटों पर तीसरे चरण में चुनाव हो रहा है। इस चरण में 1 करोड़ 3 लाख 76 हजार 22 मतदाता 10814 बूथों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। 1500 से अधिक वोटर वाले बूथों के लिए 413 सहायक मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। इस चरण में मतदान की खातिर 11945 कंट्रोल यूनिट और 16671 बैलेट यूनिट का इस्तेमाल किया जायेगा।

इन सीटों के लिए पड़ेंगे वोट: एक नजर

वाल्मीकिनगर, रामनगर , नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया, सिकटा, रक्सौल, सुगौली, हरसिद्धि , गोविंदगंज, केसरिया, कल्याणपुर, मोतिहारी, बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे , हथुआ, सिवान, जीरादेई, दरौली , रघुनाथपुर, दरौंदा, बड़हरिया, गोरियाकोठी, महाराजगंज, एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा (अ.जा.), अमनौर, परसा, सोनपुर, हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजापाकड़ (अ.जा.), राघोपुर, महनार और पातेपुर (अ.जा.)

सोमवार, 25 अक्टूबर 2010

नीतीश-लालू के बीच सीधी बहस हो--आडवाणी

हाजीपुर। पूर्व उपप्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अमेरिका की तरह भारत में भी नेताओं के बीच सीधी बहस कराए जाने की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि अच्छा होता बिहार की जनता प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को एक ही मंच से सीधी बहस करते देखती।

पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया और वैशाली के हाजीपुर में अलग-अलग सभाओं को संबोधित करते हुए आडवाणी ने अमेरिका की तर्ज पर चुनाव के दौरान देश में भी नेताओं के बीच सीधी बहस कराए जाने की वकालत करते हुए कहा कि अच्छा होता बिहार की जनता प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद को एक ही मंच से सीधी बहस करते देखती।

आडवाणी ने कहा कि अगर लालू को नीतीश के साथ बहस करने से संकोच हो तो भाजपा सांसद एवं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद के साथ सीधी बहस कर सकते हैं।

आडवाणी ने टीवी पर निक्सन एवं कैनेडी की सीधी बहस का जिक्र करते हुए कहा कि जिस प्रकार से अमेरिका में टीवी पर वहां के नेताओं के बीच सीधी बहस होती है कितना अच्छा होता अगर उसी प्रकार से यहां भी होने लगे।

टीवी समाचार चैनलों की बढ़ती संख्या पर खुशी जताते हुए आडवाणी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान स्थानीय उम्मीदवारों के बीच भी एक मंच पर आमने सामने की सीधी बहस होनी चाहिए थी।

लोकतंत्र में चुनावी सभाओं के स्वरूप में बदलाव की आवश्यकता जताते हुए आडवाणी ने कहा कि देश का संविधान बनने के बाद वर्ष 1952 में पहला चुनाव हुआ उसके बाद से लेकर अगले चार चुनावों तक लोकसभा और देश के सभी विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ होते रहे। लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि निर्धारित अवधि के अनुसार 1972 में लोकसभा के चुनाव होने थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में ही लोकसभा को भंग कर चुनाव करवा दिए, जिसके बाद से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग होने लगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा संविधान की धारा 356 का केंद्र द्वारा बार बार दुरुपयोग करते हुए कई प्रदेशों की सरकारों को भंग किया जाता रहा।

आडवाणी ने कहा कि धीरे-धीरे ऐसी स्थिति आ गई है कि कभी लोकसभा का चुनाव होता है तो कभी विधानसभाओं का और पूरे समय देश की जनता चुनाव में लगी रहती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न तो राजनीति, प्रशासन के दृष्टिकोण से और न ही मतदाताओं के लिए। आडवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री से कुछ दिन पहले उनकी जो मुलाकात हुई थी उसमें उन्होंने उनसे कहा था कि देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ होने चाहिएं।

लोगों से भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान राजग सरकार को पांच साल मौका दिए जाने की दुहाई देकर अगर लालू जी लोगों से वोट मांगते हैं तो राजग के नेता उनसे सीधे तौर पर यह कह सकते हैं कि आपको जनता ने 15 साल का मौका दिया और उसके बाद सत्ता से बेदखल क्यों कर दिया।

आडवाणी ने आरोप लगाया कि यहां की पिछली सरकार के बारे में उन्हें अक्सर यह सुनने को मिला कि उसके शासनकाल में अपहरण एक व्यवसाय बन गया था और उसमें तत्कालीन सरकार स्वयं भागीदार बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि जब से यहां नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में राजग की सरकार सत्ता में आई तब से इस पर रोक लगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज जब देश छोड़कर गए थे तो बिहार की यह स्थिति नहीं थी और यह प्रदेश प्रशासनिक दृष्टिकोण से सबसे बढि़या राज्य माना जाता था पर धीरे-धीरे यहां अपराध बढ़ता गया और इसमें उस समय और भी वृद्धि हुई जब विभिन्न पार्टियों ने अपराधी छवि वाले लोगों को चुनाव मैदान में उतारकर विधानसभा भेजना शुरू कर दिया।

आडवाणी ने राज्य की जनता का आह्वान किया कि वह 21वीं शताब्दी को भारत की शताब्दी बनाने का संकल्प लें और बिहार के विकास और बेहतर शासन के लिए राज्य में अगली सरकार राजग की बनाएं।

बिहार राजनीति की छह सूत्री हकीकत

- योगेन्द्र यादव (वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)
छह चरणों के चुनाव का जायजा छह दिन में लगा लेना तो किसी के बस की बात नहीं है। अब तक दो चरण हो चुके हैं और चुनाव प्रक्रिया के बीचोबीच चुनावी परिणाम का आकलन करने का यहाँ कोई इरादा नहीं है।

यूँ भी सीटों की चुनावी भविष्यवाणी से तौबा कर चुका हूँ। लेकिन छह चरण के इस चुनाव के बहाने बिहार की बदलती राजनैतिक हकीकत के बारे में छह दिन में जो सीख पाया उसके छह सूत्र पेश कर रहा हूँ।

पहला सूत्र: बिहार के विकास की बात करना अभी जल्दबाजी है लेकिन विकास की आस जरूर बंधी है।

पिछले पाँच साल में बिहार के चहुँमुखी विकास के दावे बेशक अतिशयोक्तिपूर्ण हैं। आर्थिक वृद्धि के आँकड़े जरूर भ्रामक हैं। लेकिन जिसे आमतौर पर विकास कहा जाता है (इस बिजली, पानी, सड़क केंद्रित धारणा को 'बिपास' कहें तो बेहतर होगा) उसके कुछ पहलुओं में पिछले पाँच साल में आशातीत बदलाव हुआ है।

राज्य के हर कोने में सड़कों का कायापलट हो गया है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर जाने लगे हैं और मरीज भी। स्कूलों में अध्यापक बढे़ हैं और बच्चों को मिलने वाली सुविधाएँ भी। यह बदलाव सिर्फ पटनाClick here to see more news from this city या चंद शहरी इलाकों में ही नहीं, कमोबेश पूरे राज्य में हुआ है।

इसका मतलब यह नहीं कि शिक्षा का स्तर या सेहत सुधर गई है। गरीबी और बदहाली मिटने की तो बात ही छोड़िए, बिजली, उद्योग और रोज़गार के अवसर अभी जस के तस हैं। नए शिक्षकों की गुणवत्ता से हर कोई नाराज है, सड़कों में भी बहुत काम बाकी है।

लेकिन तीन दशक के बाद बिहार में आस लौटी है।

दूसरा सूत्र: सुशासन अभी दूर की कौड़ी है लेकिन शासन वापस आया है। औरत-मर्द, गरीब-अमीर, अगड़ा-पिछड़ा हर कोई मानता है कि दबंगई, रंगदारी, अपहरण और बाहुबल के जोर से बेगार पहले से बहुत घटे हैं।

लालू-राबड़ी राज के अंतिम दिनों का ‘अंधेर नगरी चौपट राजा वाला’ माहौल खत्म हुआ है। भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ, शायद पहले से कुछ बढ़ा ही है। लेकिन जनता को भरोसा है कि नीतीश कुमार अब इस पर कुछ करेंगे।

फिलहाल जनता चुनाव से पहले कुछ दबंग नेताओं से नीतीश कुमार के समझौते को नजरंदाज करने को तैयार है। बढ़ती अफसरशाही झेलने को तैयार है।

अगर सुशासन जनकल्याण के लिए और जनता के प्रति जवाबदेह सरकार का नाम है तो बाकी देश की तरह बिहार उससे कोसों दूर है। बस कोई पच्चीस-तीस साल बाद (जगन्नाथ मिश्र के कांग्रेस राज में शुरू हुए युग के बाद से) शासन वापस आया है, सरकार दिखने लगी है।

तीसरा सूत्र: मीडिया निष्पक्ष भले ही न हो, लेकिन उसकी कही हर बात झूठ नहीं है। विकास और सुशासन के नाम पर प्रचार के चलते बिहार का मीडिया सत्तारूढ़ सरकार के साथ खड़ा नजर आता है।

अपनी छवि के प्रति अति-सजग नीतीश कुमार सरकार के जरिए प्रत्यक्ष-परोक्ष तरीकों से मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें जानकार लोगों से छुपी नहीं हैं।

यूँ भी बिहार की मीडिया पर आज भी अगड़ी जातियों का वर्चस्व है। उनके स्वार्थ और पूर्वाग्रह नीतीश सरकार से जुड़े हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नीतीश के पक्ष में जाने वाली हर खबर झूठी है।

पिछले चुनावों में मीडिया की तस्वीर और गरीब-गुरबा के जनमत से उभरने वाली छवि दो विपरीत संकेत देती थीं। इस बार ऐसा दिखाई नहीं देता।

चौथा सूत्र: जाति का चश्मा हटा नहीं है, लेकिन उसका नंबर बदल गया है। बाकी देश की तरह जाति बिहार के समाज, राजनीति और मन में बसी है। आम वोटर नेताओं, पार्टियों और सरकार को जाति के चश्मे से देखता रहा है। इस बार भी देखेगा।

फर्क यही है कि पहले किसी भी सरकार से कामकाज की संभावना इतनी दूरस्थ थी कि जाति के चश्मे से अपने स्वजातीय उम्मीदवार और नेता के सिवा और कुछ दिखता ही नहीं था।

अब यह संभावना नजदीक के चश्मे से भी दिखने लगी है। समाज में जातीय समीकरण पलटने से इस चश्मे का नंबर भी बदला है। अगड़ों में नीतीश के प्रति अनुराग कम होने की भरपाई अति-पिछड़ों के जबरदस्त समर्थन और महादलित और पसमांदा मुसलमानों में सेंध से हो सकती है।

उधर राजद-लोजपा गठबंधन के पक्ष में यादव और पासवान जाति का ध्रुवीकरण पहले से ज्यादा हुआ है, लेकिन बाकी सब तरफ उन्हें नुकसान हो सकता है।

पाँचवाँ सूत्र: लालू का सूरज डूबा नहीं हैं, लेकिन यह चुनाव नीतीश के इर्द-गिर्द हो रहा है। लालू प्रसाद यादव बिहार में सामाजिक क्रांति के अगुवा रह चुके है। पिछड़े और गरीब आज भी उन्हें स्नेह और सम्मान से देखते हैं।

लेकिन जिस आवाज का उठना लालू प्रसाद ने संभव बनाया, आज नीतीश कुमार उस आवाज को सुनने और उसकी अपेक्षाएँ पूरी करने के प्रतीक बन रहे हैं।

इस लिहाज से यह चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व के इर्द-गिर्द सिमट रहा है। उनके आभामंडल के सामने उनका अपना दल छोटा पड़ रहा है। भाजपा और राजग तो कहीं चर्चा में भी नहीं हैं।

छठा सूत्र: चुनाव पूरे हो जाएँगे लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है। पिछली बार जदयू-भाजपा गठबंधन लालू-राबड़ी राज के विरुद्ध आक्रोश के बल पर सत्ता पा गया था। इस बार अगर उनकी सत्ता में वापसी होती है तो उस जनादेश के साथ जनाकाँक्षाएँ भी जुडी होंगी।

इस बार लोग न्यूनतम से संतुष्ट नहीं होंगे। सिर्फ अध्यापकों की बहाली नहीं, बल्कि शिक्षा माँगेगे। रंगदारी घटने भर से खुश नहीं होंगे, दैनंदिन भ्रष्टाचार का ख़ात्मा चाहेंगे।

पूछेंगे कि इन सड़कों पर चलकर हम कहाँ जाएँ? बदहाली से छुटकारा चाहेंगे। रोजगार माँगेगें। अमन के साथ साथ इंसाफ भी माँगेगे।

नीतीश की राजनैतिक चुनौती वहाँ शुरू होगी। उन्हें सोचना पड़ेगा कि क्या बिहार का विकास महाराष्ट्र और पंजाब की नक़ल से किया जा सकता है या नहीं। पूछना होगा कि परिवर्तन कि राजनीति कहाँ तक अफसरशाही के सहारे की जा सकती है। बटाईदार ही नहीं पूरे भूमि के सवाल पर एक राय बनानी पड़ेगी।

बिहार का यह चुनाव बचपन में पढ़ी बाबा खड्ग सिंह की कहानी याद दिलाता है। अगर नीतीश कुमार इस बार चुनाव नहीं जीतते तो बिहार में कोई सरकार फिर कभी सड़कें नहीं बनाएगी। विकास और सुशासन का नाम भी नहीं लेगी।

लेकिन साथ ही साथ यह चुनाव रेणु की कालजयी कृति 'मैला आँचल' की भी याद दिलाता है। अगर नीतीश चुनाव जीत कर विकास और सुशासन की उसी डगर पर चलते हैं जो विश्व बैंक और योजना आयोग ने तय की है तो एक बार फिर बावनदास को मरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

बिहार चुनावों के जादूगर है नीतीश व सुशील

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव प्रचार संबंधी विवाद से पिंड छुड़ाने के प्रयास में भाजपा ने सोमवार को कहा कि यहां के जादूगर नीतीश और सुशील हैं।

भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हर जगह के जादूगर अलग-अलग होते हैं और बिहार में विधानसभा चुनावों में जादूगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी हैं। इनका जादू बिहार में चल रहा है। बिहार में राजग के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में आई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने यह टिप्पणी एक सवाल के जवाब में की, जिसमें उनसे पूछा गया था कि गुजरात के पंचायत चुनावों में नरेंद्र मोदी का जादू चल गया है तो ऐसे में इस जादूगर को यहां क्यों नहीं बुलाया जा रहा है? एक अन्य प्रश्न के जवाब में सुषमा ने कहा कि नरेंद्र मोदी के बिहार चुनाव प्रचार के संबंध में नीतीश कुमार ने कोई शर्त नहीं रखी थी और न ही मोदी को प्रचार करने से रोका था।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने सोचा कि पुराने चुनावों में जो व्यवस्था चल रही थी, वही 2010 के विधानसभा में भी आजमाया जाए। इसी के तहत बिहार में टिकटों का बंटवारा भी हुआ है।

सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

तीसरे चरण के 48 सीटों पर मतदान के लिए अधिसूचना जारी

तीसरे चरण के मतदान को ले सोमवार को 48 सीटों के लिए अधिसूचना जारी कर दी गयी। राज्य के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी कुमार अंशुमाली के अनुसार जिन 48 सीटों के लिए आज अधिसूचना जारी की गयी वहां 28 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। नामांकन आज से ही आरंभ हो गया। नामांकन की आखिरी तारीख 11 अक्टूबर है। 14 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जिन सीटों के लिए आज अधिसूचना जारी की गयी उनमें नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया, सिकटा, रक्सौल, सुगौली, हरसिद्धी (सु), गोविंदगंज, केसरिया, कल्याणपुर, मोतिहारी, बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे (सु), हथुआ, सिवान, जीरादेई, दरौली (सु), रघुनाथपुर, दरौंदा, बड़हरिया, गोरियाकोठी, महाराजगंज, एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा (सु), अमनौर, परसा, सोनपुर, हाजीपुर, लालगंज, राजापाकर (सु), राघोपुर, महनार, पातेपुर (सु), वाल्मीकिनगर व रामनगर (सु) विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। जिन 48 सीटों के लिए आज अधिसूचना जारी की गयी है उनमें पातेपुर (सु),वाल्मीकिनगर तथा रामनगर (सु) सीट पर मतदान शाम तीन बजे ही समाप्त हो जायेगा। शेष सीटों पर शाम पांच बजे तक मतदान होगा।

पहले चरण की 47 सीटों में 711 नामांकन

राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार पहले चरण की 47 सीटों के लिए 711 प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए। मधुबनी व सीमांचल के सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज व कटिहार जिले में स्थित कुल 47 विधानसभा क्षेत्रों में नामांकन दाखिल किए जाने की अंतिम तारीख सोमवार को समाप्त हो गयी। दूसरे चरण के सीटों के लिए अब तक 133 प्रत्याशियों ने नामांकन किया है जबकि सोमवार को जिस तीसरे चरण की अधिसूचना जारी की गयी उनमें तीन प्रत्याशियों ने आज पर्चे भरे। पहले चरण के तहत जिन सीटों पर मतदान होना है उनके लिए पर्चा दाखिल करने वालों में सिमरी बख्तियारपुर से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष महबूब अली कैसर व राजद के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी का नाम भी शामिल है जिन्होंने अली नगर विधानसभा सीट के लिए अपना पर्चा भरा है। कई पूर्व सांसदों ने भी पहले चरण के तहत होने वाले मतदान में अपनी किस्मत आजमाएंगे। इसमें मधेपुरा से रमेंद्र कुमार रवि, लवली आनंद और रंजीता रंजन के नाम शामिल हैं। प्रथम चरण के नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को सहरसा, सुपौल,मधेपुरा,पूर्णिया,अररिया,किशनगंज व कटिहार जिले के विधानसभा क्षेत्रों के लिए 420 प्रत्याशियों ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया। इनमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर, पूर्व सांसद डा. रमेंद्र कुमार यादव रवि, रंजीत रंजन और लवली आनंद समेत कई निवर्तमान विधायक शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बदला प्रचार का अंदाज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चुनाव प्रचार का अंदाज बदल दिया है। पटना से रोजाना चुनाव प्रचार के लिए जाने के बदले वे क्षेत्रों में कैंप करेंगे। उन्होंने मधेपुरा, बेतिया और भागलपुर में पड़ाव डालने का निर्णय लिया है। वहीं से वे विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में हेलीकाप्टर या सड़क मार्ग से जाएंगे। आठ अक्टूबर को श्री कुमार जदयू के चुनाव प्रचार अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री ने द्वितीय चरण को छोड़ पहले चार चरणों में कैंप करने के लिए अलग-अलग जगह तय की है। प्रथम चरण में वे 8-13 अक्टूबर तक मधेपुरा में कैंप करेंगे और वहीं से हेलीकाप्टर और सड़क मार्ग से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार को जाएंगे। प्रदेश प्रवक्ता रवींद्र सिंह के अनुसार केवल द्वितीय चरण में मुख्यमंत्री श्री कुमार पटना से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में हेलीकाप्टर से चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। तृतीय चरण में श्री कुमार दो दिनों तक बेतिया में कैंप कर चुनाव प्रचार करेंगे। चौथे चरण के लिए वे दो दिनों तक भागलपुर में कैंप करेंगे और वहीं से चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे।

बुधवार, 29 सितंबर 2010

चुनाव में पकड़ी जाएगी बाइक भी

चुनाव में मोटरसाइकिल वालों की भी खैर नहीं। चुनावी काम के लिए अब मोटरसाइकिल पर भी सरकार की नजर है। इनका भी अधिग्रहण किया जाएगा। परिवहन विभाग ने विधिवत इसके लिए मुआवजे की दर का भी निर्धारण कर दिया है। दैनिक 100 रुपये। यह राशि ईधन के अतिरिक्त मिलेगी। साथ ही चुनाव के लिए अधिगृहित ट्रक और मिनी ट्रक के मुआवजे के दर में भी वृद्धि कर दी गयी है। जुलाई महीने में ही परिवहन विभाग ने आदेश जारी कर चुनाव की खातिर पकड़े जाने वाले वाहनों के लिए मुआवजे की दर का निर्धारण किया था। 27 सितम्बर को इस दर में थोड़ा संशोधन कर दिया गया है। अब ट्रक के लिए 850 रुपये के बदले दैनिक 1000 रुपये और मिनी ट्रक के लिए 380 रुपये के बदले 600 रुपये की दर से मुआवजे की राशि अदा की जायेगी। जुलाई की सूची में डम्पर मिनी डोर/एस मैजिक/फोर्स (7 बैठान क्षमता वाले तिपहिया वाहन) और मोटरसाइकिल नहीं थे। अब इन्हें भी शामिल कर दिया गया है। डम्पर के लिए दैनिक 830 रुपये तथा मिनी डोर/एस मैजिक/फोर्स (7 बैठान क्षमता वाले तिपहिया वाहन) के लिए दैनिक 250 रुपये की दर से मुआवजा राशि अदा की जायेगी। ईधन की राशि अलग से दी जायेगी।

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

जदयू प्रत्याशियों को सिंबल बंटने शुरू

जनता दल(यू) ने अपने प्रत्याशियों की सूची अभी जारी नहीं की है, लेकिन उम्मीदवारों को सिंबल बांटना शुरू कर दिया है। मंगलवार को दिन भर मुख्यमंत्री निवास पर पहले दो चरणों के लिए चयनित उम्मीदवारों को सिंबल देने का सिलसिला जारी रहा। प्रत्याशियों की सूची जारी होने की प्रतिक्षा में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ शाम में जदयू कार्यालय में जमा हो गयी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहले दो चरणों के लिए जिनके नामों का चयन किया गया है, उनमें छह मंत्री- रेणु कुशवाहा, नरेंद्र नारायण यादव, विजेंद्र यादव, हरि प्रसाद साह, रामनाथ ठाकुर और वृषिण पटेल शामिल हैं। दो सिटिंग विधायकों को टिकट नहीं दिया गया है। ये सकरा से विलट पासवान और मधेपुरा से मनिंद्र कुमार मंडल है। महिलाओं में रून्नीसैदपुर से गुड्डी देवी, रूपौली से बीमा भारती और धमदाहा से लेसी सिंह चुनाव लड़ेंगी। परिसीमन के कारण बेनीपट्टी के सिटिंग विधायक शालिग्राम यादव की सीट बदलकर हरलाखी कर दी गयी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी सरायरंजन से चुनाव लड़ेंगे। जिन उम्मीदवारों के नाम तय हो चुके हैं उनमें झंझारपुर से नीतीश मिश्र, फुलपरास से सपा से जदयू में आये देवनाथ यादव की पत्‍‌नी, लौकहा से हरि प्रसाद साह, निर्मली से अनिरूद्ध यादव, सुपौल से विजेंद्र यादव, छातापुर से नीरज बब्लू, जोकीहाट से मो. तस्लीमुद्दीन के पुत्र मो. सरफराज, मधेपुरा से डॉ. रमेंद्र कुमार रवि, ठाकुरगंज से गोपाल अग्रवाल, किशनगंज से तस्लीमुद्दीन, रूपौली से बीमा भारती, धमदाहा से लेसी सिंह, आलमनगर से नरेंद्र नारायण यादव, बिहारीगंज से रेणु कुमारी, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर बचौल, समस्तीपुर से रामनाथ ठाकुर, विभूतिपुर से राम बालक सिंह, उज्जियारपुर से राम लखन महतो, कल्याणपुर से रामसेवक हजारी, नोखा से बैद्यनाथ सहनी, सकरा से सुरेश चंचल, दरभंगा ग्रामीण से अशरफ हुसैन, बहादुरपुर से मदन सहनी, हायाघाट से नरेंद्र सिंह, मीणापुर से दिनेश कुशवाहा, रून्नी सैदपुर से गुड्डी चौधरी, हसनपुर से राजकुमार यादव, साहेबगंज से राजू सिंह, वैशाली से वृषिण पटेल, लालगंज से मुन्ना शुक्ला की पत्‍‌नी अन्नु शुक्ला, कुढ़नी से मनोज कुशवाहा, सूरसंड से शाहिद अली खां, सरायरंजन से विजय कुमार चौधरी, विभूतिपुर से रामबालक सिंह, कल्याणपुर से रामसेवक हजारी, वारिसनगर से अशोक कुमार मुन्ना, मौरवा से बैद्यनाथ सहनी, कांटी से अजीत कुमार, बरूराज से नंद कुमार राय, घोड़ाबोराम से डा.इजहार अहमद, अलीनगर से प्रभाकर चौधरी, ढाका से फैसल रहमान, मधुबन से शिवजी राय एवं शिवहर से मो.शरफुद्दीन शामिल हैं। इनमें से अधिकांश को मंगलवार को सिंबल दे दिया गया है।

पांच जिलों के डीएम, तीन पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी बदले

चुनाव आयोग के निर्देश पर पांच जिलों के डीएम, तीन पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी बदल दिये गये। बेतिया, मुंगेर, वैशाली, छपरा और लखीसराय में नये डीएम तथा मधुबनी, किशनगंज और नवगछिया में नये एसपी भेजे गये हैं। मगध आयुक्त, तिरहुत आईजी और बेतिया डीआईजी के पद पर नये अधिकारी भेजे गये हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के बिहार आगमन पर राजनीतिक दलों ने अफसरों की तैनाती को लेकर शिकायत की थी। समझा जाता है कि उसी आलोक में अफसरों का फेरबदल किया गया है। सूत्रों के अनुसार आयोग द्वारा नये अफसरों के लिए सीधा नाम भेजे जाने को लेकर सरकार और आयोग के बीच हल्की खींच-तान भी रही। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सचिव कला एवं संस्कृति विवेक कुमार सिंह को मगध प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया है। कृषि निदेशक बी राजेन्द्र को बेतिया, निदेशक मध्याह्न भोजन (मानव संसाधन विभाग) प्रेम सिंह मीणा को मुंगेर, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह नगर आयुक्त पटना नगर निगम श्रीधर चिरीबोलू को वैशाली, अध्यक्ष बिहार राज्य पुल निर्माण निगम कुलदीप नारायण को छपरा और संयुक्त सचिव परिवहन विभाग दिवेश सेहरा को लखीसराय का जिलाधिकारी बनाया गया है। मगध आयुक्त केपी रामय्या, बेतिया डीएम देवराज देव, मुंगेर डीएम अभिजित सिन्हा, हाजीपुर डीएम मिन्हाज आलम, छपरा डीएम पंकज कुमार पाल और लखीसराय डीएम मनीष कुमार को सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान करने का निर्देश दिया गया है। इसमें बेतिया डीएम देवराज देव तामिलनाडु, मुंगेर डीएम अभिजित सिन्हा नागालैण्ड और हाजीपुर डीएम मिन्हाज आलम केरल कैडर के अधिकारी हैं। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार तिरहुत प्रक्षेत्र के आईजी गुप्तेश्वर पांडेय को पुलिस मुख्यालय बुला लिया गया है। श्री पांडेय की जगह आईजी (आर्थिक अपराध कोषांग) प्रवीण वशिष्ठ को तिरहुत प्रक्षेत्र के आईजी के रूप में पदस्थापित किया गया है। पुलिस उप महानिरीक्षक, चंपारण क्षेत्र (बेतिया) उमेश कुमार को भी पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया है। श्री कुमार की जगह डीआईजी विशेष शाखा अनुपमा एस निलेकर को चंपारण क्षेत्र का डीआईजी बनाया गया है। एसपी (विशेष शाखा) अजिताभ कुमार को मधुबनी का नया एसपी बनाया गया है। चौरसिया चंद्रशेखर आजाद को किशनगंज से हटाकर पुलिस मुख्यालय बुला लिया गया है। श्री चौरसिया की जगह पटना के रेल एसपी, पंकज कुमार राज को किशनगंज का एसपी बनाया गया है। परिवहन विभाग में पुलिस अधीक्षक, उड़नदस्ता के रूप में पदस्थापित विवेक कुमार को नवगछिया का नया एसपी बनाया गया है। बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी मिट्ठु प्रसाद फिलहाल नवगछिया में एसपी के रूप में तैनात थे। उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया है। इसी तरह बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी सौरभ कुमार जो मधुबनी में एसपी के तौर पर पदस्थापित थे को पुलिस मुख्यालय में योगदान करने को कहा गया है।

प्रथम चरण के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी

प्रथम चरण में बिहार विधानसभा की 47 सीटों पर चुनाव के लिए सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी गयी। इसके साथ ही नामांकन का काम भी प्रारंभ हो गया। राज्य निर्वाचन कार्यालय पहुंची सूचना के अनुसार पहले दिन मात्र पांच लोगों के नामांकन पत्र दाखिल किये जाने की सूचना है। खजौली से एक, सुपौल से एक, लौकहा से दो और छातापुर से एक व्यक्ति ने नामांकन पत्र दाखिल किया।

इधर राज्य के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी कुमार अंशुमाली ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब सिर्फ सिमरी बख्तियारपुर में अपराह्न तीन बजे तक मतदान होगा। पहले सिमरी बख्तियारपुर के साथ-साथ महिषी में भी तीन बजे तक मतदान का आदेश जारी किया गया था। नामांकन का काम आज से प्रारंभ हो गया है। 4 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। 5 को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 7 को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है। 21 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। मतदान का समय सुबह सात बजे से सायं सात बजे तक निर्धारित है। प्रथम चरण में एकमात्र मनिहारी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। राजनगर, त्रिवेणीगंज, रानीगंज, बनमनखी, कोढ़ा, सिंहेश्वर और सोनबरसा यानी सात सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

प्रथम चरण के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी

प्रथम चरण में बिहार विधानसभा की 47 सीटों पर चुनाव के लिए सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी गयी। इसके साथ ही नामांकन का काम भी प्रारंभ हो गया। राज्य निर्वाचन कार्यालय पहुंची सूचना के अनुसार पहले दिन मात्र पांच लोगों के नामांकन पत्र दाखिल किये जाने की सूचना है। खजौली से एक, सुपौल से एक, लौकहा से दो और छातापुर से एक व्यक्ति ने नामांकन पत्र दाखिल किया।

इधर राज्य के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी कुमार अंशुमाली ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब सिर्फ सिमरी बख्तियारपुर में अपराह्न तीन बजे तक मतदान होगा। पहले सिमरी बख्तियारपुर के साथ-साथ महिषी में भी तीन बजे तक मतदान का आदेश जारी किया गया था। नामांकन का काम आज से प्रारंभ हो गया है। 4 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। 5 को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 7 को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है। 21 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। मतदान का समय सुबह सात बजे से सायं सात बजे तक निर्धारित है। प्रथम चरण में एकमात्र मनिहारी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। राजनगर, त्रिवेणीगंज, रानीगंज, बनमनखी, कोढ़ा, सिंहेश्वर और सोनबरसा यानी सात सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

रविवार, 26 सितंबर 2010

चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष की उम्मीद

बिहार विधानसभा चुनाव से संबंधित महीने भर चलने वाला अभियान सोमवार से शुरू होगा, जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व में सत्तारूढ़ जद यू-भाजपा गठबंधन, राजद-लोजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की उम्मीद की जा रही है।

इस वर्ष यह पहला विधान सभा चुनाव है और चुनाव आयोग कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता है। क्योंकि राज्य के कई जिले नक्सल प्रभावित हैं। राज्य के राज्यपाल देवआनंद कुंवर ने शनिवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण की अधिसूचना जारी की। राज्य में 243 सदस्यीय विधानसभा में 5.50 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इस विधानसभा का कार्यकाल 27 नवंबर को समाप्त हो रहा है। राज्य में 243 सीटों के लिए छह चरणों में चुनाव होंगे और यह 21, 24 और 28 अक्टूबर के साथ एक, नौ और 20 नवंबर को होंगे। बिहार के 33 जिलों में 47 सीटें माओवाद प्रभावित हैं।

चुनाव आयोग ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अ‌र्द्धसैनिक तैनात करने का निर्णय किया है। राज्य में 38 जिले हैं। राज्य में 24 नवंबर को मतगणना होगी। बिहार विधानसभा चुनाव के साथ राज्य में बांका लोकसभा सीट पर भी एक नवंबर को उपचुनाव हो रहे हैं, जो वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह के निधन के कारण रिक्त है। राज्य में चुनाव के त्रिकोणीय होने की संभावना है, जहां सत्ताधारी जद यू और भाजपा का गठबंधन जारी है, जबकि इस गठबंधन को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए राजद के लालू प्रसाद ने लोजपा के रामविलास पासवान से हाथ मिलाया है। कांग्रेस ने राज्य में अकेले दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि पूर्व में वह राजद की कनिष्ठ सहयोगी की भूमिका में रहती थी। अंतिम क्षणों में रूकावटों को दूर करते हुए राजद और लोजपा के बीच गठजोड़ हुआ और यह तय किया गया कि राजद 168 सीटों पर और लोजपा 75 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। क्योंकि वह पहले ही विधान परिषद के सदस्य हैं। राजद-लोजपा गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालू प्रसाद भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। कांग्रेस ने किसी को मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं किया है। बहरहाल, विभिन्न खेमों में उम्मीदवार के चयन को लेकर जोरदार गतिविधियां चल रही हैं। हाल ही में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य के दौरे पर गए मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सम्पन्न कराने की व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया था।

नीतीश शासनकाल में अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर बिहार बुलाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा [आईएएस] और भारतीय पुलिस सेवा [आईपीएस] अधिकारियों को 'फील्ड पोस्टिंग' से हटाने की विपक्षी दलों की मांग के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतें सही पाए जाने पर ही उन्हें हटाया जाएगा। बिहार के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी कुमार अंशुमाली ने बताया कि अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर आए, जो प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जिलों या प्रमंडलों में पदस्थापित हैं, उन्हें तभी हटाया जाएगा जब उनके खिलाफ मिली शिकायत को सही पाया जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य के विपक्षी दल आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नीतीश शासनकाल में दूसरे राज्यों से बुलाए गए नौकरशाहों को 'फील्ड पोस्टिंग' से हटाने की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्त पर बुलाए गए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को जिलों और प्रमंडलों में तैनात कर नीतीश सरकार उनसे अपने पक्ष में काम कराना चाहती है।

दिल्ली में चुनाव आयोग के सूत्रों ने भी कुमार अंशुमाली के बयान की यह कह कर पुष्टि की 'भारत निर्वाचन आयोग का स्पष्ट मत है कि अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर बिहार के जिलों और प्रमंडलों में तैनात अधिकारियों को उनके खिलाफ किसी तरह की शिकायत सही पाए जाने पर ही हटाया जाएगा।

बीते मंगलवार को बिहार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी कहा था कि इन अधिकारियों को हटाया तो नहीं जाएगा, लेकिन उन पर आयोग की 'पैनी नजर' जरूर रहेगी। फिलहाल बिहार में चार आईपीएस अधिकारी ऐसे हैं जो दूसरे कैडर है, लेकिन नीतीश सरकार उन्हें अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर बिहार लेकर आई है। इनमें तीन पुलिस उप-महानिरीक्षक [डीआईजी] जबकि एक पुलिस अधीक्षक [एसपी] स्तर के अधिकारी हैं।

विपक्षी दल जिन अधिकारियों को हटाने की मांग कर रहे हैं, उनमें बेतिया रेंज के डीआईजी उमेश कुमार सबसे ऊपर हैं। कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी उमेश भाजपा के वरिष्ठ नेता गंगा प्रसाद के दामाद हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्वी चंपारण के एसपी रहे उमेश पर चुनाव क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल [सीआरपीएफ] की तैनाती नहीं करने का आरोप लगाया गया था। सिक्किम कैडर के विनीत विनायक और झारखंड कैडर के पंकज दाराद 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। विनीत अभी सेंट्रल रेंज, जबकि पंकज मुजफ्फरपुर रेंज के डीआईजी हैं। नगालैंड कैडर के एक आईपीएस अधिकारी अभी जमालपुर में रेल एसपी के पद पर तैनात हैं। इसी तरह, नगालैंड कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी अभिजीत सिन्हा मुंगेर के जिलाधिकारी हैं, जबकि त्रिपुरा कैडर के 1995 बैच के आईएएस जितेंद्र कुमार सिन्हा अभी पटना के जिलाधिकारी हैं। असम कैडर के 1996 बैच के आईएएस अधिकारी विनोद कुमार अररिया के जिलाधिकारी पद पर हैं। वैशाली के जिलाधिकारी मिन्हाज आलम केरल कैडर, जबकि गया के जिलाधिकारी उड़ीसा कैडर के आईएएस हैं। तमिलनाडु कैडर के आईएएस देव राज देव अभी पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी पद पर हैं।

बुधवार, 22 सितंबर 2010

चुनाव की तारीखों में परिवर्तन नहीं: कुरैशी

छठ पर्व और बाढ़ के बावजूद बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। चुनावी तैयारी की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय दौरे पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि पांचवें चरण का मतदान नौ नवंबर को दीपावली और छठ के बीच है। यह तारीख अच्छी तरह विचार करके तय की गई है। इसमें परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है। गोपालगंज और करीबी इलाकों में बाढ़ से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि चार-पांच दिनों में बाढ़ का पानी उतर जाता है, तो ठीक अन्यथा जरूरी हुआ तो बूथों का लोकेशन बदला जाएगा या मोबाइल बूथ के इंतजाम किये जाएंगे। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ी तो मतदान की तारीख में परिवर्तन से परहेज नहीं। मंगलवार को दिल्ली रवाना होने से पूर्व कुरैशी ने कहा कि चुनाव को लेकर हमारी तैयारी पूरी है। कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव कराए जाएंगे। फोर्स की कमी नहीं है। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सुरक्षित मतदान की मुकम्मल व्यवस्था है। मतदान को प्रभावित करने वाले दबंगों की पहचान के लिए हर बूथ का नक्शा बनाया गया है। लोगों को डराने-धमकाने वालों पर कड़ी नजर रहेगी।